Kaise manaya jata hai Makar Sankranti ka tyohaar?! मकर संक्रांति के दिन क्‍यों उड़ाते हैं पतंग : क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्‍यौहार

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Namaste doston, aaj hum aapko batayengay ki Makar Sankranti ka tyohaar kaise manaya jata hai, waise toh aap sub jante he hai, but jo log nahi jante hai unke liye…Makar Sankranti ka tyohaar humare desh mei bade he dhum dham se manaya jata jai, sabhi ghar ki aurate ghar ki saaf safai karke, aangan mei rangoli banati hai, aur kayi prakaar ke bhojan bhi banati hai, is din ghar ke sabhi bade log nayi nayi poshaak pehan ke surya devta ki puja karte hai aur unse prarthna karte hai ki unke ghar mei khushyaali, aur samraddhi aaye.

Is tareekay se is din ki shuruwaat hoti hai aur Makar Sankranti ka tyohaar shuru hota hai!

 

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Kaise manaya jata hai Makar Sankranti ka tyohaar?

 

हिन्दू धर्म के विभिन्‍न अन्‍य त्‍यौहारों की तरह ही मकर संक्रांति भी हिन्‍दू धर्म का प्रमुख त्‍यौहार है। मकर संक्रांति को मनाने के संदर्भ में कई तरह की बाते व तथ्‍य कहे जाते हैं।

एक तथ्‍य के अनुसार यह माना जाता है कि भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्‍वयं उनके घर जाते हैं और शनि मकर राशि के स्‍वामी है। इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। पवित्र गंगा नदी का भी इसी दिन धरती पर अवतरण हुआ था, इसलिए भी मकर संक्रांति का त्‍यौहार मनाया जाता हैं।

महाभारत में पितामाह भीष्‍म ने सूर्य के उत्‍तरायण होने पर ही स्‍वेच्‍छा से शरीर का पतित्‍याग किया था। इसका कारण यह था कि उत्‍तरायण में देह छोड़ने वाली आत्‍माएँ या तो कुछ काल के लिए देवलोक में चली जाती है या पुनर्जन्‍म के चक्र से उन आत्‍माओं को छुटकारा मिल जाता है। जबकि दक्षिणायण में देह छोड़ने पर आत्‍मा को बहुत काल तक अंधकार का सामना करना पड़ सकता है।

स्‍वयं भगवान श्री कृष्‍ण ने भी उत्‍तरायण का महत्‍व बताते हुए कहा है कि उत्‍तरायण के 6 मास के शुभ काल में जब सूर्य देव उत्‍तरायण होते हैं और पृथ्‍वी प्रकाशमय रहती है तो इस प्रकाश में शरीर का परित्‍याग करने से व्‍यक्ति का पुनर्जन्‍म नहीं होता है और ऐसे लोग सीधे ही ब्रह्म को प्राप्‍त होते हैं। इसके विपरीत जब सूर्य दक्षिणायण होता है और पृथ्‍वी अंधकार मय होती है तो इस अंधकार में शरीर त्‍याग करने पर पुन: जन्‍म लेना पड़ता है।

मकर संक्रांति के दिन क्‍यों उड़ाते हैं पतंग:

 

भारत में प्रतिवर्ष कई तरह के त्‍यौहार मनाऐं जाते हैं और उन त्‍यौहारों के संबंध में कई तरह की मान्यताएं व परंपराएं भी प्रचलित होती हैं। जैसे दिवाली पर पटाखें जलाना, तो होली पर रंग खेलना। ठीक इसी तरह से मकर संक्रांति पर भी पतंगे उड़ाई जाती है।

अनेक स्थानों पर इस त्यौहार पर पतंग उड़ाने की परंपरा प्रचलित है। लोग दिन भर अपनी छतों पर पतंग उड़ाकर हर्षोउल्‍लास के साथ इस उत्सव का मजा लेते हैं। अनेक स्थानों पर विशेष रूप से पतंग उड़ाने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं अपितु मनोवैज्ञानिक पक्ष है। गुजरात व सौराष्‍ट्र में मकर संक्रांति के त्‍यौहार पर कई दिनों का Holiday रहता है और यहीं इस त्‍यौहार को भारत के किसी भी अन्‍य राज्‍य की तुलना में अधिक हर्षोल्‍लास से मनाया जाता है।

पौष मास की सर्दी के कारण हमारा शरीर कई तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है, जिसका हमें पता ही नहीं चलता और इस मौसम में त्वचा भी रुखी हो जाती है। इसलिए जब सूर्य उत्तरायण होता है, तब इसकी किरणें हमारे शरीर के लिए औषधि का काम करती है और पतंग उड़ाते समय हमारा शरीर सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आता है, जिससे अनेक शारीरिक रोग जो हम जानते ही नहीं हैं वे स्वत: ही नष्ट हो जाते हैं।

 

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मकर संक्रांति के दिन क्‍यों खातें हैं तिल और गुड़:-

भारत में हर त्योहार पर विशेष पकवान बनाने व खाने की परंपराएं भी प्रचलित हैं। इसी श्रृंखला में मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष रूप से तिल व गुड़ के पकवान बनाने व खाने की परंपरा है। कहीं पर तिल व गुड़ के स्वादिष्ट लड्डू बनाए जाते हैं तो कहीं चक्की बनाकर तिल व गुड़ का सेवन किया जाता है। तिल व गुड़ की गजक भी लोग खूब पसंद करते हैं लेकिन मकर संक्रांति के पर्व पर तिल व गुड़ का ही सेवन क्‍यों किया करते है इसके पीछे भी वैज्ञानिक आधार है।

सर्दी के मौसम में जब शरीर को गर्मी की आवश्यकता होती है तब तिल व गुड़ के व्यंजन यह काम बखूबी करते हैं, क्‍योंकि तिल में तेल की प्रचुरता रहती है जिसका सेवन करने से हमारे शरीर में पर्याप्त मात्रा में तेल पहुंचता है और जो हमारे शरीर को गर्माहट देता है। इसी प्रकार गुड़ की तासीर भी गर्म होती है। तिल व गुड़ को मिलाकर जो व्यंजन बनाए जाते हैं वह सर्दी के मौसम में हमारे शरीर में आवश्यक गर्मी पहुंचाते हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति के अवसर पर तिल व गुड़ के व्यंजन प्रमुखता से खाए जाते हैं।

क्या है लोहड़ी का त्‍यौहार:-

हमारे देश में मकर संक्रांति के पर्व को कई नामों से जाना जाता है। पंजाब और जम्‍मूकश्‍मीर में इसे लोहड़ी के नाम से बहुत ही बड़े पैमाने पर जाना जाता है। लोहड़ी का त्‍यौहार मकर संक्रांति के एक दिन पूर्व मनाया जाता है। जब सूरज ढ़ल जाता है तब घरों के बाहर बड़े-बड़े अलाव जलाए जाते हैं और स्‍त्री तथा पुरूष सज-धजकर नए-नए वस्‍त्र पहनकर एकत्रित होकर उस जलते हुए अलाव के चारों और भांगड़ा नृत्‍य करते हैं और अग्नि को मेवा, तिल, गजक, चिवड़ा आदि की आहुति भी देते हैं।

देर रात तक सभी लोग नगाड़ों की ध्‍वनि के बीच एक लड़ी के रूप में यह नृत्‍य करते हैं। उसके बाद सभी एक-दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाऐं देते हुए आपस में भेंट बाँटते हैं और प्रसाद वितरण भी करते हैं। प्रसाद में मुख्‍य पाँच वस्‍तुएँ होती है जिसमें तिल, गुड़, मूँगफली, मक्‍का और गजक होती है।

 

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क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्‍यौहार:-

लोहड़ी का त्‍यौहार मनाने के संदर्भ में कंस और श्री कृष्‍ण से सम्‍बन्धित एक कथा कही जाती है कि कंस हमेंशा ही बाल कृष्‍ण को मारने के लिए प्रतिदिन नए-नए प्रयास करता था।

एक बार कंस ने बाल श्री कृष्‍ण को मारने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल में भेजा था और बालकृष्‍ण ने खेल-खेल में ही उसे मार दिया था। उसी लोहिता नामक राक्षसी के नाम पर ही इस उत्‍सव का नाम लोहड़ी पड़ा। उसी घटना की स्‍मृति में लोहड़ी का पावन पर्व मनाया जाता है।

Hum aasha karte hai ki aako humara post pasand aaya ho, is tyohaar pe humari taraf se aap sabhi ko hardik shubhkamnaye aur hare saari badhaiyaan. Happy Makar Sankranti.